प्यार कब मिला

on Saturday, 6 October 2012
चाहा था दिल ने जिसको वो दिलदार कब मिला 
सब कुछ मिला जहाँ में मगर प्यार कब मिला 

तनहा ही ते किये हैं ये पुरखार रास्ते 
इस जीस्त के सफ़र में कोई यार कब मिला 

बाज़ार से भी गुज़रे  हैं हाथों में दिल लिए 
लेकिन हमारे दिल को खरीदार कब मिला 

उल्फत में जां भी हंस के लुटा देते हम मगर
हम को वफ़ा का कोई तलबगार कब मिला 

तनहा ही लड़ रहा हूँ हालाते जीस्त से 
हसरत को जिंदगी में मददगार कब मिला 

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