दुआ नहीं देता

on Sunday, 12 February 2017
दिल से कोई दुआ नहीं देता
दर्दे दिल की दवा नहीं देता

कितना संगदिल हे वो सनम मेरा 
कुछ भी ग़म के सिवा नहीं देता 

मेरी क़िस्मत का डूबता सूरज 
रौशनी का पता नहीं देता 

लोग कहते हैं तू मसीहा है 
मुझको क्यों कर शिफ़ा नहीं देता 

सबकी उम्मीद बर नहीं आती 
सबको सब कुछ ख़ुदा नहीं देता 

एक ख़ूबी हे उसमे ए हसरत 
वो किसी को दग़ा नहीं देता 


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