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नादान भला तू ही बता कैसे मिलेगी
आंधी से चराग़ों को वफ़ा कैसे मिलेगी
मुंसिफ़ भी उसी का है उसी की है अदालत
क़ातिल को गुनाहों की सज़ा कैसे मिलेगी
हर गुल को सिखा देते हो नफ़रत का सलीक़ा
गुलशन से तुम्हें बू ए वफ़ा कैसे मिलेगी
तडपेगा बहुत रोयेगा दुनिया में सितमगर
जल्लाद को आसान क़ज़ा कैसे मिलेगी
ये सोच के कल रात को रोया हूँ बहुत मैं
दिल तोड़ने वाले को दुआ कैसे मिलेगी
हसरत तू बता मैं तो बहुत ढूंढ चूका हूँ
माँ जैसी ज़माने में वफ़ा कैसे मिलेगी



