बहल जायेगा दिल बहलते बहलते

on Saturday, 23 February 2013
इन आँखों से आंसू निकलते निकलते
कटी  रात करवट बदलते बदलते

मोहब्बत हे मुझसे तो कह दो किसी दिन
इशारे से छत  पर टहलते टहलते

मोहब्बत की राहों  में  कांटे मिलेंगे
उठाना क़दम तुम संभलते संभलते     

यकीं हे  मुझको के इक रोज़ खुद ही
बहल जायेगा दिल बहलते बहलते

मेरी याद जब जब सताएगी हसरत
वो रोयेंगे आँखें मसलते मसलते 

आशना कर दे

on Sunday, 2 December 2012
अब तो पूरी ये आरजू कर दे
मैँरे दामन मे तू खुशी भर दे

दर्द देकर तू अपनी चाहत का
मुझको उल्फत से आशना कर दे

कब से हैं मुंतज़िर मेरी आखें
इन चिरागोँ मेँ रोशनी भर दे

चँद कतरोँ से अब मैँरी हरगिज
प्यास बुझती नहीँ समँदर दे

या खुदा अब तो उनके कूचे मेँ
खत्म हसरत की जिन्दगी कर दे 

उल्फत की निशानी

on Tuesday, 30 October 2012
हर दिल में मुहब्बत की अब शमअ जलानी हे
अब हमको तअस्सुब की ये आग बुझानी हे

नफरत से न तुम देखो हमको ऐ जहाँ वालों
हमसे ही तो उल्फत के दरिया में रवानी हे

हे उसके ही हाथों में इज्ज़त भी ओ ज़िल्लत भी
ये कौल नहीं मेरा आयाते कुरानी हे

क्या खूब अजूबा हे देखो तो जहाँ वालों
पत्थर की ईमारत भी उल्फत की निशानी हे

अश्कों के तलातुम को रोकोगे भला केसे
खुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी हे

इस ग़म का सबब क्या हे लो तुम को बताता हूँ
हसरत के भी सीने में इक याद पुरानी हे

शायरी मिल गयी

on Saturday, 13 October 2012
तुम मिले तो मुझे हर ख़ुशी मिल गयी 
यूँ लगा के मुझे जिंदगी मिल गयी 

कांच सा टूटकर दिल बिखर जायेगा 
अब इसे गर तेरी बेरुखी मिल गयी 

तेरी चाहत ने दिल को बनाया हे दिल 
क्या हुआ गर मुझे बेकली मिल गयी 

इस तरह दिल को रोशन किया आपने 
यूँ लगा रात को चांदनी मिल गयी 

सुन के आवाज़ तेरी मुझे यूँ लगा 
मेरे नगमो को अब रागनी मिल गयी 

तुझको देख तो दिल से ये आई सदा 
मुझको हसरत मेरी शायरी मिल गयी 

तूफ़ान है

on Sunday, 7 October 2012
हक की खातिर लड़ते जाना बस तेरी पहचान है
सामने हर वक़्त तेरे जंग का मैदान है

ऐ वतन तेरे लिए तो हे मेरा सब कुछ फ़िदा
दिल फ़िदा हे तन फ़िदा हे उर फ़िदा ये जान है

जिस तरफ देखो वहीँ पे जल रही हैं बस्तियां
ये हमारे वक़्त की सबसे सही पहचान है

इस मुसीबत में खुदाया तू मेरी इमदाद कर
बीच सागर में हे कस्ती सामने तूफ़ान है

हाँ खुदा मिल जायेगा "हसरत" मिटा दूं गर खुदी
नफ्स से लड़ना मगर किसने कहा आसान है

तेरी भी रुसवाई है

दिल में तेरी याद बसी हे डसती ये तन्हाई है
फीकी फीकी लगती मुझको अब तो हर रानाई है

फिर से दिल में दर्द उठा हे आँख मेरी भर आई है
बेठे बेठे आज यकायक याद किसी की आई है

उसको भी ना चैन मिलेगा वो भी यूँ ही तड़पेगा
मेरे दिल के इस गुलशन में जिसने आग लगाई है

अब तो आजा देर ना कर तू पूछ रहे हैं सब मुझसे
किसकी ख़ातिर तुमने आख़िर महफ़िल आज सजाई है

पार उतरने की ही ख़ाहिश सबके दिल में हे भाई
पूंछे कोन समंदर से तुझमे कितनी गहराई है

रुसवा करके मुझको आख़िर तू कैसे बच पायेगा
हसरत गर बदनाम हुआ तो तेरी भी रुसवाई है

उतर जाए सफीने से

सदा आती है ये अक्सर तड़प के मेरे सीने से
तेरे क़दमों में दे दूं जां जुदा रहकर के जीने से



मोहब्बत के मुसाफिर को कभी मंजिल नहीं मिलती
जिसे साहिल की हसरत है उतर जाए सफीने से


मोहब्बत जो भी करते हैं बड़ी तकदीर वाले हैं
चमक जाती हैं तकदीरें मोहब्बत के नगीने से



तेरी यादों के जुगनू हैं तेरी खुशबू हे साँसों में
यही मोती मिले मुझको मोहब्बत के खजीने से


किसी आशिक की तुर्बत पे ग़ज़ल मैंने पढी हसरत
मुक़र्रर की सदा आई अचानक उस दफीने से